Thursday, December 24, 2009

माँ वैष्नो के दर्शन




हम शादी के बाद जम्मू में माँ वैष्नो के दर्शन के लिए गये ! वहां मुझे बहुत अच्छा लगा उस दिन मेरे लाइफ का महत्वपूर्ण दिन था ! एक तो मेरा जन्मदिन और उस पर पुरे दिन आशीष का साथ मेरे लिए तो सोने पे सुहागा वाली बात थी ! उसी दिन हमने माँ के दर्शन भी किये ! इस से बढ़ कर मेरे लिए ख़ुशी की बात और क्या हो सकती थी! मैं हमेशा से ही यही सोचती थी की पता नही मैं माँ के दर्शन के लिए कभी जा भी पयुंगी या नही लेकिन माँ ने हम दोनों को एक साथ पास बुलाया ! हमारी यात्रा अच्छी रही ! हाँ आशीष जी को मेरी तरफ से थोड़ी परेशानी जरुर झेलनी पड़ी लेकिन वो भी हमारी यात्रा के एक खुशनुमा याद में शामिल हो गया !

Monday, December 21, 2009

शादी के बाद ऑफिस का पहला दिन

फिर से वही दिन की शुरुआत सुबह- सुबह ऑफिस के लिए भागना और आते ही काम में लग जाना............ शादी के बाद ऑफिस आने में थोड़ी झिजक हो रही थी अपने आप को कुछ बदला हुआ जो देख रही थी मांग में सिंदूर, गले में मंगल सूत्र और माथे पर गोल सी चमकती हुई बिंदिया जिसको देख कर मुझे बहुत शर्म आ रही थी एक बार लगाती तो दुसरे ही पल हटा दे रही थी मैं ! लास्ट में बिंदिया को नही लगा पाई सोचा कोई कुछ भी बोले मांग में सिंदूर तो है ही ना ! ऐसे लग रहा था पता नही ऑफिस में क्या बदल गया होगा, लेकिन आज आकर वो ही पहेले जैसा लगा कुछ भी नही बदला था वो ही लोग वो ही बाते सुब कुछ पहले जैसा ही रहा !

आज दिन की शुरआत अच्छी रही आते ही पहला surprise मिला मेरे साथ में काम करने वाली लड़की की शादी हो चुकी थी उस की मांग में सिंदूर देख कर मैं तो चोक ही गयी अरे ! ये वो ही है या कोई और ! चलो कुछ भी हो उसको मनपसंद जीवन साथी मिल गया और हमारे लिए इस से बढ़ कर क्या हो सकता है ! शादी का बंधन भी बड़ा अजीब होता है किसी को बनाने में बरसो लग जाते है और कोई एक दिन में ही एक दुसरे के बन जाते है ! लेकिन क्या एक दिन में ही एक दुसरे को अपना बना लेना  सही होता है ! इस समय तो हमे अपने बड़ो के आशीर्वाद की बहुत जरुरत होती है ना ???

मेरा दूसरा surprise ऑफिस में मेरी सलेरी में बढ़ोतरी हो गयी थी सुना तो लगा की भाई ऑफिस वाले भी जानते है की शादी के बाद कितने खर्चे बढ़ जाते है ! ठीक है ये काम तो चलो ऑफिस वालो ने अच्छा ही किया ! नही तो हमेशा बिजली के क्र्रेंट की तरह झटके वाली ही खबरे सुन ने को मिलती है !

Monday, December 07, 2009

I am going to merry

Dear friends, I am going to marry with Ashish Kumar Rana on 11th December 2009 at my home town Meerut. I humbly expect your best wishes on the auspicious occasion of wedding ceremony.

Thursday, November 26, 2009

फ़र्ज़

हर एक खुशी फ़र्ज़ निभा कर चली गई
मेरा पता गमो को बता कर चली गयी !

यूँ तो हर एक मौसम बिजली गिरा गया
बरसात आके घर को जला कर चली गयी
मेरा पता ग़मों को बता कर चली गयी !

क्या खूब जानती थी फिजा घर के रास्ते
फासले बहार आंख चुरा कर चली गयी
मेरा पता ग़मों को बता कर चली गयी !

मेरे नसीब में थे कहां महकते चमन
फूलो की सूरत भी कांटे चुभन कर चली गयी
मेरा पता गमो को बता कर चली गयी !

दिखा कर खुशी को रास्ते मेरे घर के
रास्तो में गहरा अँधियारा फेला कर चली गयी
मेरा पता गमो को बता कर चली गयी !

यूँ तो हमने भी देखी थी चमक सितारों की
बनके चमक भी अंगारे बरसा के चली गयी
मेरा पता गमो को बता कर चली गयी !

दिखा हर एक सूरत में प्यार छलकता जहां
बनके मेहमां घर को बसा कर चली गयी
मेरे पता गमो को बता कर चली गयी !

Friday, November 20, 2009

Ehsaas तेरे आने का

लोग कहते हैं ज़मीं पर किसी को खुदा नहीं मीलता
शायद उन लोगों को हमसफ़र कोई तुम-सा नहीं मिलता

किस्मतवालों को ही मिलती है पनाह किसी के दिल में
यूं हर शख़्स को तो जन्नत का पता नहीं मिलता

अपने सायें से भी ज़यादा यकीं है मुझे तुम पर
अंधेरों में तुम तो मिल जाते हो, साया नहीं मिलता

इस बेवफ़ा ज़िंदगी से शायद मुझे इतनी मोहब्बत ना होती
अगर इस ज़िंदगी में दोस्त कोई तुम जैसा नहीं मिलता

अपनों के साये से भी बढ़ कर मैंने तुझे पाया है
कभी मत कहना की हम से किसी को प्यार नही मिलता

आपको होगी हमसे कोई शिकायत तो हक़ से मिटा देना
प्यार में फना होने वाला आपको कोई हमसा नही मिलता

Wednesday, November 18, 2009

वक्त की कीमत

हर ख़ुशी है लोगो के दामन में
पर एक हंसी के लिए वक्त नही
दिन रात दौड़ती दुनिया में
जिंदगी के लिए ही वक्त नही !!!!

माँ की लोरी का एहसास तो है
पर माँ को माँ कहने का वक्त नही
सारे रिश्तो को तो हम मार चुके
अब उन्हें दफ़नाने का भी वक्त नही !!!!

सारे नाम मोबाइल मैं है
पर दोस्ती के लिल्ये वक्त नही
गैरों की क्या बात करें
जब अपनों के लिए ही वक्त नही !!!!

आँखों में है नीद बड़ी
पर सोने का वक्त नही
दिल है गमो से भरा हुआ
पर रोने का भी वक्त नही !!!!

पैसों की दौड़ में ऐसे दौड़े
की थकने का भी वक्त नही
पराये एहसासों की क्या कद्र करें
जब अपने सपनो के लिए ही वक्त नही !!!!

तू ही बता ये जिंदगी
इस जिंदगी का क्या होगा
की हर पल मरने वालों को
जीने के लिए भी वक्त नही !!!!

अनजाने रिश्ते

 कभी-कभी हम अनजाने में किसी के लिए कितना कुछ कर जाते है सोच भी नही सकते की ये हमने ही किया है ! और वो भी किसी ऐसे अनजान इन्सान की लिए जिसके साथ में हमारा दूर-दूर तक कोई रिश्ता नही होता फिर भी हम अपनों से भी बढ़ कर करते है, आज की भाग दोड भरी जिन्दगी में हम ऐसे किनते ही लोगो से मिलते है बात करते उनके दुःख सुख बाटते है साथ हँसते है रोते है! लेकिन उनमे से कितने हमारे साथ आगे चल पाते है ?.........

मैं ये तो नही कहूंगी की कभी किसी अनजान रिश्ते से नही जुड़ना चाहिए ! चाहे वो दोस्त के रूप में हो भाई के हो या बहन के रूप में मिले ! लेकिन ये सवाल आज मेरे सामने एक बहुत बड़ा पहाड़ बनकर खड़ा है जो हमेशा मुझे ऐसे ही एक रिश्ते की याद दिलाता रहता है जिसे मैंने दोस्त के रूप में पाया ! बीते दिनों के बारे में सोचती हूँ तो अपने आप से नफरत होने लगती है की मैंने ऐसे इंसान से दोस्ती क्यों की जिसे दोस्ती का अर्थ तक मालूम नही था ! अपनी जिन्दगी का बेशकीमती टाइम मैंने उसे दिया ! हर प्रकार से उसकी मदद करती थी ! इतना तो मैंने कभी अपने कैरिएर पर धयान नही लगाया जितना मैं उसके लिए इधर से उधर भागती थी ! बस उस वक्त यही लगता था की एक अच्छे इन्सान की मदद करना मेरा फर्ज है जो मुझे करनी चाहिए और कुछ नही चाहती थी मैं बस यही सोचती थी की अगर मैं अपने दोस्त के लिए कुछ कर सकती हूँ तो मुझे करना चाहिए कुछ भी सोचे समझे! शाएद ही कभी इतना मैंने कभी अपने परिवार वालो की लिए सोचा हो ! आज यही बात मुझे दुःख देती है की मैंने अपनों से बढकर जिसकी मदद की उसने मेरे विश्वास को रोंद दिया ! पैसो की भी कभी कमी नही आने दी जब देती थी तो लगता था की आज मेरे पास है तो मुझे उस की मदद करनी चाहिए शाएद भगवन की यही मर्जी है जो मुझे दोस्त बनाकर वो अपने भक्तो की मदद करना चाहता है ! हर एक कदम मैं भगवन को याद करके ही आगे बढाती थी फिर आज मुझे क्यों पछतावा हो रहा है अपनी करनी पर ! क्यों नही भुला पा रही मैं वो सब जो मैंने उस इन्सान के लिए किया...?

आज मुझे लगता है की अगर मैंने इतना कुछ उस दोस्त रूपी इन्सान के लिए किया तो इसमें में भी उपर वाले की ही कोई मर्जी रही होगी ! शायद पिछले जन्म का कोई कर्ज चुकाना था मुझे जो मैंने चुका दिया ! अब बाद में क्या पछतावा करना की मेरा अपना बनकर किसी ने मुझ से क्या लिया और क्या दिया.........

Tuesday, November 03, 2009

वो भीगे हुए चाँद की रोशानी

आज चमकते हुए चाँद को देखने की आस है
तेरे संग में तारो के साथ मिल कर खेलने की प्यास है !!

जमी पर चाँद ने आज बिखेरा है अपना शर्मीला हुस्न
क्या? आज तेरे आने की भी कोई आस है मेरे आगन में !!

तारो ने मनाई है आज ख़ुशी चलो कही तो प्यास है
मेरी न सही किसी की तो आज बुझी बरसो की प्यास है !!

सुनहरे रेती पर चमकते हुए चाँद की वो प्यारी रौशनी
आज भी याद है मुझे बचपन की हंसी जब देखी वो चांदनी !!

भूले से भी नही भुला सकती वो चमकते हुए रेत की खुशी
मैं भी खुश होती थी उसके साथ में दिल में न थी कोई आस भी !!

जाते हुए लम्हों को करना चाहती हूँ शामिल अपनी यादो में
बर्षो के बाद जगी है आज तमन्ना क्या फिर से भी जा पाऊँगी !!

जो जिए थे मैंने अनजाने से एहसास खुबसूरत चाँद के साथ में
क्या फिर से जा पाऊँगी मैं उस चमकते हुए देश में ??????????

Wednesday, October 28, 2009

क्या खेल रचाया है किस्मत ने

ज़माने की रहेगुजर ने बहुत सताया है हमे
अपना बुला कर भी परायो का मेडल दिलवाया है हमे !!

नही है इस दिल की कोई भी शिकायत तुमसे
मेरी किस्मत ने भी ये क्या खेल रचाया है !!

यादो ने भी किनारा कर लिया है अब तो हमसे
जब से तेरे नाम को भुलाने का फरमान आया है !!

क्या भुला पाएँगे हम जिन्दगी के वो बीते हुए पल ?.
आज भी यही सवाल बार-बार इस दिल ने दोहराया है !!

सोचा न था जिन्दगी के किसी मोड़ पर यू मुलाकात होगी
और तेरी बर्बादी के इस आलम में हमारी इतनी बड़ी सोगात होगी !!

समझाने के लिए कुछ भी नही रहा मेरे पास अब इस दिल को
रोता है जब भी मेरा ये दिल तेरे संग बीते पलो को याद करके !!

यादो का बवंडर हिला जाता है मुझे जब भी जाती हूँ उस दरबार में
लेकर दुआ की पोटली सबके लिए और तेरे नाम के आंसू इन आँखों में लिए !!

सोचती हूँ जाना ही छोड़ दू अब जहाँ भी तेरी यादो का बसेरा है
लेकिन क्या करूं इस दिल का अब तो तेरी यादो का ही सहारा है !!

जाना चाहती हूँ मैं इन रिश्तो के बन्धनों से बहुत दूर
जहाँ न मिले मुझे कोई अपना बनाने और बुलाने के लिए !!

( दिल की चुभन होती है जब सीने में, आंसूं नही होते है आँखों में लेकिन इस दिल की हालत लहूँ-लुहान होती है और लबो पर झूटी मुस्कान होती है) आज मैंने एक सच्ची प्रेम कहानी पढ़ी उसको पढने के बाद मैं अपनी आँखों के आंसू रोक नही पाई.........सही कहा है किसी ने प्यार किसी को banata है तो किसी को mita dalta है...

Monday, October 19, 2009

तीन साल के बाद मनी दिवाली

ये ऑफिस भी क्या आफत बनाई है...... कुछ भी करो, कही पर भी रहो लोट कर आना वही पड़ता है किसी भी हालत में.......दिवाली का सारा नसा उत्तर जाता है जब थके हरे हमे सुबह ही ऑफिस के लिए भागना पड़ता है वो भी इन लबो पर चार इंच की मुस्कान लिए हुए..............

क्या राम जी के टाइम में भी इसी तरह से दिवाली मानते होंगे..???

जब दिवाली से पहले की तेयारी होती है तो उनहे करने में बडा मज़ा आता है, सब के लिए कुछ-न-कुछ खरीदना, घर में कुछ नया करना और अपने बडो के लिए तोफे लेना और भी बहुत कुछ........ दिल्ली में आने के बाद मैं दिवाली चाह कर भी नही मना पाई, पूरा दिन घर में ही अकेले रहती थी, मेरे लिए तो ये फेस्टिवल न होकर छुट्टी का दिन बन जाता था. बचप्पन से ही दिवाली का मुझे बहुत क्रेज़ रहा है पुरे साल में बस यही फेस्टिवल होता था जब मैं पूरा इंजॉय करती थी ! मेरे लिए तो दिवाली साल की शुरुआत होती थी हर काम में सबसे आगे होती थी चाहे वो घर की सफाई हो , खाना बनाना हो, या घर के मेन दरवाजे पर सुंदर सी रंगोली बनानी हो, पूरा इंजॉय होता मेरा परिवार के साथ.........
रिश्तो को समंझ पाना बहुत मुस्किल होता है ये मैंने बहुत बार महसूस किया है ! एक इन्सान को उसकी अपने जिन्दगी में जितना दुःख मिलता है वो उसका अपनों का ही दर्द होता है.... अगर वो दर्द देते है तो उस से निकालते भी वही रिश्ते है, बहुत ही अजीब होती है ना ये रिश्तो की डोर...........

इस बार की दिवाली मेरी ठीक रही जायदा तो नही रही लेकिन अपनों के साथ में कुछ टाइम बिता कर दिल को बहुत सुकून मिला.....बहुत अच्छा इस लिए नही क्यों की मैं पूरी तरह से इंजॉय नही कर पाई इस बेरहम शारीर ने साथ ही नही दिया, जालिम बुखार बीच में ही टपक पड़ा ये भी नही सोचा की कभी तो गलती से गलती कर ले ! टाइम से पहेले ही एंट्री करा देता है ये मुयाँ.............


Wednesday, October 14, 2009

Kuch Tu Hua Haiiiiiiiiii Do-Char Din Se Lagta Hai Aise.........(My Faviorate song)

दिल ने आज की है चाहत तेरे ही दीदार की
हमने भी दी है उसे इजाजत कुछ कर गुजर जाने !

Badla है आज maosam भी mere gher ke samne
dhunti है ye najre khi se aa jauo chupe se tum mere samne !!

Lamho की khawhish भी है आज कुछ badli- badli
दिल me ehsaas भी है आज कुछ shehme-shehme se !!!

Monday, October 12, 2009

बिखरा सा नजर आता है !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

बिखरना तो जैसे हमारी जिन्दगी का एक हिस्सा बन गया है, घर से लेकर ऑफिस तक सब भीखरा हुआ नजर आता है अपने आप को भी हम पूरी तरह से नही समंझ पाते है सब कुछ अलग-अलग सा नजर आता है...... आज शुबह ऑफिस आते ही पता चला की मेरी ट्रान्सफर कर दी गयी है दुसरे डिपार्टमेन्ट में ... हमने तो खुशी से स्वीकार कर लिया सोचा की इस में भी शायद हमारी भलाई छुपी हो बस माता रानी का आशीर्वाद बना रहे हमारे उपर..........घर में होते है तो वहां  भी कुछ साफ नजर नही आ रहा होता है सब कोई अपनी -अपनी रामधुन में लगे होते है और ऐसे लगता है जैसे की जिन्दगी सुपर फास्ट ट्रेन से भी तेज दौड़ रही है जिसका स्टाप तो है लेकिन उसके पास रुकने के लिए टाइम नही है.........

आज तक मैं बिखरने का मतलब नही समंझ पाई हूँ बचपन से लेकर अब तक सुब कुछ बिखरा ही मिला, रिश्तो को अभी तक नही समझ पाई उनको कितना ही इएकठा करने की कोशिश करो वो फिर से आस्ट दिशायो की तरह फैल जाते है.........ये भिखरना मुझे बहुत परेशान कर जाता है और कभी-कभी अच्छा भी लग जाता है अगर वो मुझे समंझ आ जाये ...........

Monday, October 05, 2009

वो यादे.........कही खो ना जाये हम

जिन्दगी में क्या- क्या नही करना पड़ता है हमे कभी हम हंसते है कभी रोते है तो कभी हम सब कुछ भुला कर इस दुनिया के पार देखना चाहते है उन्ही पुरानी जगहों पर जाना चाहते है जहाँ हमे एश्सास हुआ था की दुनिया कितनी खुबसूरत है..........वो बचपन के दिन जब मैं खुली तेज हवा के साथ उड़ती थी शाम के होते ही घर की छत पर चली जाती थी बादलो से बाते करने की उनको हवा के साथ कैसा लग रहा है पंछी मेरे साथ गुन-गुनगुनाते थे लगता था पूरा आसमा मेरे साथ झूम रहा हो..............


कहते है बीते दिन कभी लोट कर नही आते है लेकिन जब भी दिल्ली में बारिश होती है और तेज हवाएं अपना हुस्न बिखेरती है साथ में बदल झूम- झूम कर अपनी खुशी का इजहार करते रहते है तो आज भी कभी- कभी वो ही एश्सास महसूस करती हूँ वो ही गाना गुन-गुना ना चाहती हूँ !!!!!!!!!!!

Monday, September 14, 2009

मन की चंचलता !

कभी मन करता
बदलो की उँचइयो तक उडु
घनघोर बरसात में भार्मन कर
भीगे बदन से टपकते पानी से
घर को पूरा भिगो दूँ
कभी बंदरो की तरह उचल
पेड़ो पर कूदते फानते
उदा कर सब ले जायुं
फिर अचनाक लगता !!!

आराम से बिस्तर पर पड़े
मनपसंद वयांजनो को स्वाद लूँ
चाय की चुस्कियां लेते
मधुर संगीत का आनान्द लूँ
आरामदेहे कमरे में विश्राम करने
शांति के वातावरण में रहूँ
फिर यौं लगता !!!

जोर जोर से चिलाकर
शांति को भंग कर दूँ
प्रेमी सव्जनो के मध्य
वार्तालाप का लुत्फ उठायुं
स्मनीयी स्थलों की सैर को निकलूं
देशाटन का आनंद लूँ
आत्मगायण में वर्धि कर लूँ
मन फिर करता !!!

एकांत मनन कर सोचु
पुस्तकालयो में जाकर
सारा गायन झान गहेन कर लूँ
झानाजार्ण कर लेने दे बाद
अपने झान को ओरो में बाटूँ
जीवन- दर्शन को समंझ
लोगो में लालक जगायं
झान-धयान और विद्या की
और तभी आनायास ही लगता !!!

यह तू मात्र छलावा
यहाँ कौन किसका और कैसा
पल भर का मात्र दिखावा
जीवन ही रैन- बसेरा
फिर क्या संध्या क्या सवेरा
यह जग यौं ही चलता
और वक्त कभी नही ठेहेरता
फिर क्या अपना क्या पराया
मैं भी बस वक्त गुजारूं
मन फिर भटकने लगता !!!

जीना क्या होगा बार-बार ?
नही ! फिर क्यों न जीउँ भरपूर
कर जायुं नाम जगत में
भूले से ही सही
कोई तो याद करेगा
कुछ धन सम्पति बचायुं
कुछ किताबे ही लिख डालूं
झान तो बाटना ही होगा
पारिवारिक जनों के परती भी
धानार्जन तो पूरी हो जाएगी
कोई कुछ भी समझे
मैं तो आपना फर्ज निभा लूँ
मन ये भी कहता !!!

ये सब भी कर लूँ
तो क्या हांसिल ?
नाम तो बदनामो का भी है
याद ही करे कोई तो कैसे भी
मैं तो उस वक्त नही हुंगी
धन होकर भी यदि मैंने
ऐश्वर्ये यापन न किया तो क्या
बंदर का अदरक सा रखूंगी
सुंदर स्वछ चमकीले वस्त्र
जो हो सबसे अलग पहनू
सब लोग मुझे देखे सराहे
केशो को ऐसे सवारूँ
मन फिर करता !!!

Wednesday, September 09, 2009

Welcome

Hi I am Savita Khari, this is my first post in this blog, here i wn't to say everybody who coming in this blog. In times of difficulties don't say, "God have a big problem" Instead say, "hey problem I have a big GOD" everything will be yours............GOD bless you.......