Thursday, January 21, 2010

फिर भी क्यों लगता है ऐसे की कुछ था मेरे सामने

उस गहरी काली रात की घटा अभी तलक तक उतरी नही
सोचती रही मैं जब तलक ये सांस मेरी चलती रही

देखना चाहती थी मैं बादलो के उस पार का वो राज
जिसके लिए मेरी ये आँखे बरसो से तरसती रही

छा गया गहन अँधियारा मेरे अपने उस जहाँन में
फिर भी क्यों लगता है ऐसे की कुछ था मेरे सामने

किनारा नही मिलता है किसी को उस सागर की ग्हेरायी में
सोच कर रह जाती हूँ मैं बस अपनी ही तान्हाहियो में

कहने के लिए कुछ शब्द ही नही थे मेरे महेकाने में
पगली बनी देखती रही मैं और कहीं दूर डूबता रहा मेरा आशियाना !!!!!!!!!!!!!

Tuesday, January 05, 2010

नया साल आया है

 " गीता सच में बतायो ना नये साल की  शुरुआत हो गयी है क्या ?. लेकिन नया जैसा तो कुछ भी नही दिख रहा है मुझे ! वही सब पुराना ही तो है ! "    बचपन में यही सवाल पुछ-पुछ कर मैं घर में सबको परेशान करती रहती थी ! और सबका जबाब यही होता था      " तू मुझे परेशान मत कर ! जा किसी और का दिमांग चाट मुझे बहुत काम करना है"     समंझ नही आता था की ये नये साल आने से होता क्या है सब कोई नया साल आ गया- नया साल आ गया करते रहते थे, लेकिन मुझे तो नये साल में कुछ नया नही लगता था ! बस यही सोच कर मैं रह जाती थी की जब महीने बदलते है तो उसे ही नया साल आ गया कहते है पहले परिवारों में बच्चो के सवालो के जबाब परिवार वालो के लिए सर का दर्द बन जाता था अगर बच्चे ने आकर किसी के बारे में कुछ पुछ लिया तो बदले में डाट-फटकार ही सुन ने को मिलती थी !

जब बड़ी हुई और थोडा पढने लगी तो तब मुझे पता चला की आखिर में नया साल कहते किसे है ! आखबार में एक दिन मैंने पढ़ा की नया साल आने पर हम अपने लिए कुछ नया करने की सोचते है और कुछ नया सिखने के लिए अपनी लाइफ को ऐसे ही जीते थे ! तब से लेकर आज तक मेरे लिए नये साल का यही अर्थ हो गया मैं हर बार कुछ करने की सोचती थी और उसी पर अटल रहने की पूरी कोसिस भी करती कभी सफल भी होती तो कभी नही भी ! जितनी बार अ-सफल होती उतनी बार मेरा विस्वास डबल हो जाता ! आज तक यही सिल-सिला चला आ रहा है और हाँ यहाँ एक और बात जब भी मैंने अपने से चीटिंग करने की सोचती या करती तो मैं अपने को ही सजा भी देती थी ! यही प्रकिर्या अभी भी चलती है !

इस बार नये साल के पहले दिन में साईं बाबा के चरणों में सर झुका के परथ्ना की है और जो भी करने के लिए सोचा है उसे पूरा करने के लिए बाबा से आशीर्वाद माँगा है ! मैं अपनी तरफ से पूरी कोसिस करुँगी की इस बार १००% नही तो उस से निचे ही सही लेकिन पूरा ही करूं !





ऑफिस में नया साल मानने का तो बस एक ही तरीका है खायो पियो और सबको नये साल की बधाई देते रहो ! चलो अच्छा है भाई ! इस बहाने पिंजरे के सारे पंछी एक साथ तो रहते है !