Tuesday, May 04, 2010

एक मुसाफिर के सफर सी है सबकी दुनिया

अब खुशी हैं न कोई दर्द रुलाने वाला,
हमने अपना लिया हर रंग जमाने वाला !

हर बेचेहरा सी उम्मीद है चेहरा -चेहरा
जिस तरफ देखिये आने को है आने वाला !

उसको रुखसत तो किया मुझे मालूम न था
सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला !


घर के चाँद को देखो किसी आँचल में
ये उजाला नही आँगन में समाने वाला !

एक मुसाफिर के सफर सी है सबकी दुनिया
कोई जल्दी में तो कोई देर से जाने वाला !

Monday, May 03, 2010

यादे जो कभी जाती नही

तेरे कदमो की आहेट सुन के हम जाग जाते थे
उस सुनेहेरे उजाले मे हम अपने को भी भूल जाते थे

कल रात हम फिर से करते रहे तेरा इंतजार
ना तू आया ना तेरी वो सुनेहरी चांदनी आई

बस करवते ही बदलते रहे हम पुरी रात भर
ना तू आया ना वो तेरी मनचली याद आई

सोचा की जाकर खोज लायू कही से तुम्हे
ओर रख लु सिऱ्हाने पर कही छुपा कर

मिल जाये वो सुकून मुझे जो तुम आ जायो
यही सोच कर बस युह्नी करवते बदलती रही

रात भर युंही उसकी याद मे जगती रही
तुम सोते रहे ओर में यादे सजोती रही