
बहुत टाइम के बाद आज ब्लॉग पर आना हुआ अपना लिखा हुआ ही पढ़ रही थी सोचा इसको पढकर ही कुछ लिखने का मन कर जाये लेकिन शब्द साथ नही दे रहे मन में बहुत विचार उमड़ रहे है जिन्हें कोरे कागज़ पर उतार कर ठहरे हुए पानी की तरह शांत हो जाना चाहती हूँ, बहुत कुछ है कहने को लेकिन.............................................