ज़माने की रहेगुजर ने बहुत सताया है हमे
अपना बुला कर भी परायो का मेडल दिलवाया है हमे !!नही है इस दिल की कोई भी शिकायत तुमसे
मेरी किस्मत ने भी ये क्या खेल रचाया है !!
यादो ने भी किनारा कर लिया है अब तो हमसे
जब से तेरे नाम को भुलाने का फरमान आया है !!
क्या भुला पाएँगे हम जिन्दगी के वो बीते हुए पल ?.
आज भी यही सवाल बार-बार इस दिल ने दोहराया है !!
सोचा न था जिन्दगी के किसी मोड़ पर यू मुलाकात होगी
और तेरी बर्बादी के इस आलम में हमारी इतनी बड़ी सोगात होगी !!
समझाने के लिए कुछ भी नही रहा मेरे पास अब इस दिल को
रोता है जब भी मेरा ये दिल तेरे संग बीते पलो को याद करके !!
यादो का बवंडर हिला जाता है मुझे जब भी जाती हूँ उस दरबार में
लेकर दुआ की पोटली सबके लिए और तेरे नाम के आंसू इन आँखों में लिए !!
सोचती हूँ जाना ही छोड़ दू अब जहाँ भी तेरी यादो का बसेरा है
लेकिन क्या करूं इस दिल का अब तो तेरी यादो का ही सहारा है !!
जाना चाहती हूँ मैं इन रिश्तो के बन्धनों से बहुत दूर
जहाँ न मिले मुझे कोई अपना बनाने और बुलाने के लिए !!
( दिल की चुभन होती है जब सीने में, आंसूं नही होते है आँखों में लेकिन इस दिल की हालत लहूँ-लुहान होती है और लबो पर झूटी मुस्कान होती है) आज मैंने एक सच्ची प्रेम कहानी पढ़ी उसको पढने के बाद मैं अपनी आँखों के आंसू रोक नही पाई.........सही कहा है किसी ने प्यार किसी को banata है तो किसी को mita dalta है...