बिखरना तो जैसे हमारी जिन्दगी का एक हिस्सा बन गया है, घर से लेकर ऑफिस तक सब भीखरा हुआ नजर आता है अपने आप को भी हम पूरी तरह से नही समंझ पाते है सब कुछ अलग-अलग सा नजर आता है...... आज शुबह ऑफिस आते ही पता चला की मेरी ट्रान्सफर कर दी गयी है दुसरे डिपार्टमेन्ट में ... हमने तो खुशी से स्वीकार कर लिया सोचा की इस में भी शायद हमारी भलाई छुपी हो बस माता रानी का आशीर्वाद बना रहे हमारे उपर..........घर में होते है तो वहां भी कुछ साफ नजर नही आ रहा होता है सब कोई अपनी -अपनी रामधुन में लगे होते है और ऐसे लगता है जैसे की जिन्दगी सुपर फास्ट ट्रेन से भी तेज दौड़ रही है जिसका स्टाप तो है लेकिन उसके पास रुकने के लिए टाइम नही है.........
आज तक मैं बिखरने का मतलब नही समंझ पाई हूँ बचपन से लेकर अब तक सुब कुछ बिखरा ही मिला, रिश्तो को अभी तक नही समझ पाई उनको कितना ही इएकठा करने की कोशिश करो वो फिर से आस्ट दिशायो की तरह फैल जाते है.........ये भिखरना मुझे बहुत परेशान कर जाता है और कभी-कभी अच्छा भी लग जाता है अगर वो मुझे समंझ आ जाये ...........
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