नही समझ आ रहा है की मुझ से हुई है क्या गलती क्या है जो छूट गया है पीछे ! कल तक तो यूँही लग रहा था की सब ठीक जा रहा है लेकिन आज अचानक लगा की बहुत बड़ी गलती हुई है मुझसे !
अपने अंदर झांक के देखा ! नही आया कुछ सामने ! लगा की सब कुछ अँधेरे में है टटोला कुछ गुजरे हुए लम्हो को कुछ अपने वार्तालापो को तो होने लगा कुछ साफ मंजर !!!!!!!!!!!!!!
कुछ कुछ मुझे समझ आने लगा की कुछ बदल रहा है मेरे अन्दर, कुछ तो है जो अपना घर बनाये जा रहा है मेरे दिलो जान पर , पूछती रही मैं अपने आप से की क्या है जो मुझे अपने आप से दूर करता जा रहा है और मैं उसमे तेजी से घुलमिल जा रही हूँ! सोचती रही मैं ! और सारे लम्हे मेरे अन्दर पानी की तरह बहने लगे ! एक पराया साया सा मुझे नजर आने लगा जो मैंने कभी अपने अन्दर महसूस नही किया ! कुछ पल उस साये को मैंने परायी नजरो से देखा और उस से पूछा की कौन हो तुम और यहाँ कैसे आये ! तो उसने मेरी बात को कुछ अनसुना सा किया लेकिन मैं भी बार बार उस से यही सवाल दोहराती रही की तुम यहाँ आये कैसे !!!!!!!!!!!!!!!
मैं बोलती रही और मेरी आँखों से आँसू की धार बहती रही! लग रहा था की कोई मेरे प्राण मांग के ले जा रहा हो और मैं उसको ना तो मना कर पा रही हूँ और ना ही उसे दे पा रही हूँ !!!
कुछ ही पलो में वो सब मेरे सामने आने लगा जिस की मैंने कल्पना भी नही की थी ! वो मेरी ही गलतियों का साया था जो मेरे ऊपर अपना हक़ जमा रहा था ! सब कुछ समझ आ रहा था की मैंने ही अनजाने में उसको पनह दे दी थी !
सब कुछ साफ साफ नजर आ गया था !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!