फिर से वही दिन की शुरुआत सुबह- सुबह ऑफिस के लिए भागना और आते ही काम में लग जाना............ शादी के बाद ऑफिस आने में थोड़ी झिजक हो रही थी अपने आप को कुछ बदला हुआ जो देख रही थी मांग में सिंदूर, गले में मंगल सूत्र और माथे पर गोल सी चमकती हुई बिंदिया जिसको देख कर मुझे बहुत शर्म आ रही थी एक बार लगाती तो दुसरे ही पल हटा दे रही थी मैं ! लास्ट में बिंदिया को नही लगा पाई सोचा कोई कुछ भी बोले मांग में सिंदूर तो है ही ना ! ऐसे लग रहा था पता नही ऑफिस में क्या बदल गया होगा, लेकिन आज आकर वो ही पहेले जैसा लगा कुछ भी नही बदला था वो ही लोग वो ही बाते सुब कुछ पहले जैसा ही रहा !
आज दिन की शुरआत अच्छी रही आते ही पहला surprise मिला मेरे साथ में काम करने वाली लड़की की शादी हो चुकी थी उस की मांग में सिंदूर देख कर मैं तो चोक ही गयी अरे ! ये वो ही है या कोई और ! चलो कुछ भी हो उसको मनपसंद जीवन साथी मिल गया और हमारे लिए इस से बढ़ कर क्या हो सकता है ! शादी का बंधन भी बड़ा अजीब होता है किसी को बनाने में बरसो लग जाते है और कोई एक दिन में ही एक दुसरे के बन जाते है ! लेकिन क्या एक दिन में ही एक दुसरे को अपना बना लेना सही होता है ! इस समय तो हमे अपने बड़ो के आशीर्वाद की बहुत जरुरत होती है ना ???
मेरा दूसरा surprise ऑफिस में मेरी सलेरी में बढ़ोतरी हो गयी थी सुना तो लगा की भाई ऑफिस वाले भी जानते है की शादी के बाद कितने खर्चे बढ़ जाते है ! ठीक है ये काम तो चलो ऑफिस वालो ने अच्छा ही किया ! नही तो हमेशा बिजली के क्र्रेंट की तरह झटके वाली ही खबरे सुन ने को मिलती है !
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