Monday, October 19, 2009

तीन साल के बाद मनी दिवाली

ये ऑफिस भी क्या आफत बनाई है...... कुछ भी करो, कही पर भी रहो लोट कर आना वही पड़ता है किसी भी हालत में.......दिवाली का सारा नसा उत्तर जाता है जब थके हरे हमे सुबह ही ऑफिस के लिए भागना पड़ता है वो भी इन लबो पर चार इंच की मुस्कान लिए हुए..............

क्या राम जी के टाइम में भी इसी तरह से दिवाली मानते होंगे..???

जब दिवाली से पहले की तेयारी होती है तो उनहे करने में बडा मज़ा आता है, सब के लिए कुछ-न-कुछ खरीदना, घर में कुछ नया करना और अपने बडो के लिए तोफे लेना और भी बहुत कुछ........ दिल्ली में आने के बाद मैं दिवाली चाह कर भी नही मना पाई, पूरा दिन घर में ही अकेले रहती थी, मेरे लिए तो ये फेस्टिवल न होकर छुट्टी का दिन बन जाता था. बचप्पन से ही दिवाली का मुझे बहुत क्रेज़ रहा है पुरे साल में बस यही फेस्टिवल होता था जब मैं पूरा इंजॉय करती थी ! मेरे लिए तो दिवाली साल की शुरुआत होती थी हर काम में सबसे आगे होती थी चाहे वो घर की सफाई हो , खाना बनाना हो, या घर के मेन दरवाजे पर सुंदर सी रंगोली बनानी हो, पूरा इंजॉय होता मेरा परिवार के साथ.........
रिश्तो को समंझ पाना बहुत मुस्किल होता है ये मैंने बहुत बार महसूस किया है ! एक इन्सान को उसकी अपने जिन्दगी में जितना दुःख मिलता है वो उसका अपनों का ही दर्द होता है.... अगर वो दर्द देते है तो उस से निकालते भी वही रिश्ते है, बहुत ही अजीब होती है ना ये रिश्तो की डोर...........

इस बार की दिवाली मेरी ठीक रही जायदा तो नही रही लेकिन अपनों के साथ में कुछ टाइम बिता कर दिल को बहुत सुकून मिला.....बहुत अच्छा इस लिए नही क्यों की मैं पूरी तरह से इंजॉय नही कर पाई इस बेरहम शारीर ने साथ ही नही दिया, जालिम बुखार बीच में ही टपक पड़ा ये भी नही सोचा की कभी तो गलती से गलती कर ले ! टाइम से पहेले ही एंट्री करा देता है ये मुयाँ.............


2 comments:

मीत said...

चलिए देर से ही सही आपको दीवाली की शुभकामनायें...
अब तो नया साल आ रहा है उसकी तयारी में जुट जाइए
मीत

Savita Rana said...

dhanyewad meet ji aapki shubhkamnayo ki liye.......nye saal se pahele shadi ke tayari kerni hai,aab sub ki dunyo ki jarurat hai..........