साल कैसे गुजरा पता ही नही चला , इस साल बहुत बदलाव हुए मेरी लाइफ में एक नया प्यार मुझे मिला अभी बोलता नही है लेकिन समझता है की मैं क्या बोल रही हूँ, जब सरारत करता है तो और भी प्यार आता है उस पर, कभी-कभी सोचती हूँ की इसके साथ बिताये सारे लम्हों को कंही संजो कर रख लूँ बहुत कीमती है.... उसके लिए मैं कैसी माँ बन पायुंगी ये तो पता नही लेकिन कोशिश हमेशा उसको अच्छा बनाने की रहेगी, अपने पापा के साथ बहुत खुश रहता है, जब वो दोनों साथ में खेलते है तो मुझे ऐसा लगता है की जैसे मैंने सारे जहान की खुशियों को पा लिया है, आशीष मुझे बहुत प्यार करते है और उस से भी जादा वो अपने बेटे से करते है, घर और ऑफिस को मैनेज करते करते मैं भूल जाती हूँ की मेरा एक रिश्ता उनसे हमसफर और एक दोस्ती का भी है। कभी तो छोटी-छोटी बात पर गुस्सा आ जाता है मुझे जब भी गुस्सा आता है तो एक बार ये जरुर सोचती हूँ की लास्ट टाइम गुस्सा कब आया था, और यही सोच कर अपने आप को शांत करने की कोशिश करती हूँ ,
इन सब के बिच आशीष बहुत सहयोग कर रहे है, मेरे गुस्से की वजह कुछ भी हो लेकिन छेलना उनको ही पड़ता है, प्यार जो करते है।।।।।।।।।।। अब इतना तो झेलना ही पड़ेगा आशीष जी ..
No comments:
Post a Comment