कुछ सवाल अपने आप से जान ना चाहती हूँ लेकिन उस के लिए भी टाइम नही मिलता, अब सवाल ही जवाब बनते जा रहे है, जो जैसे कहता है करता है करवाता है, सब मेरे लिए जवाब बनते जा रहे है ऐसे लगता है समय के पहिये के साथ मैं कटपुतली बनी चल रही हूँ, जिसकी बारडोर तो है लेकिन चलती अपने आप है.
" कुछ बदलना चाहती हूँ , पर क्या ?????????"
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