Friday, September 24, 2010

आलम है ये जो गुजरता ही नही


बहुत टाइम के बाद आज ब्लॉग पर आना हुआ अपना लिखा हुआ ही पढ़ रही थी सोचा इसको पढकर ही कुछ लिखने का मन कर जाये लेकिन शब्द साथ नही दे रहे मन में बहुत विचार उमड़ रहे है जिन्हें कोरे कागज़ पर उतार कर ठहरे हुए पानी की तरह शांत हो जाना चाहती हूँ, बहुत कुछ है कहने को लेकिन.............................................

3 comments:

माधव( Madhav) said...

sundar thought

संजय भास्‍कर said...

इतने लम्बे समय के बाद आपको देखना मतलब आपकी ब्लॉग-पोस्ट को पढ़ना अच्छा लगा.

संजय भास्‍कर said...

Welcome back.........Savita Rana ji