
देखती हुँ मैं जब-जब तेरी सुरत दिल को मेरे करार आता है
तु दुर ही सही मुझ से ! मेरे इस दिल के करीब तो रहता है
न तुझ से कह पाए ना खुद ही जान पाए अपने दिल की हालत
मेरे इस कम्बख्त दिल को भी अभी तेरा दुर जाना याद आया
दूर रह के भी हक़ जताते हो मुझ पर तुमने क्या रोब जमाया है
कभी तो सुनाया करो अपनी आवाज भी जिस से हमे करार आता है
सुबह जगते ही तेरा ख्याल आता है जाने क्यों तुम इतना याद आते हो
तु दुर ही सही मुझ से ! मेरे इस दिल के करीब तो रहता है
न तुझ से कह पाए ना खुद ही जान पाए अपने दिल की हालत
मेरे इस कम्बख्त दिल को भी अभी तेरा दुर जाना याद आया
दूर रह के भी हक़ जताते हो मुझ पर तुमने क्या रोब जमाया है
कभी तो सुनाया करो अपनी आवाज भी जिस से हमे करार आता है
सुबह जगते ही तेरा ख्याल आता है जाने क्यों तुम इतना याद आते हो
आँखे मलते जाते है अपने आगंन में फिर भी तुम नजरो से दूर होते हो
यादे बड़ी जालिम होती है डूबा देती है हमे तेरे आतीत के आईने में
समझाते है फिर अकेले में बैठ कर दिल को जब भी बहुत याद आता है
यादे बड़ी जालिम होती है डूबा देती है हमे तेरे आतीत के आईने में
समझाते है फिर अकेले में बैठ कर दिल को जब भी बहुत याद आता है
4 comments:
cute poem.....
सुबह जगते ही तेरा ख्याल आता है जाने क्यों तुम इतना याद आते हो
आँखे मलते जाते है अपने आगंन में फिर भी तुम नजरो से दूर होते हो ..
ये तो हसीन लोगो की अदा है ... बहुत अच्छा लिखा है ....
बढ़िया भाव...नियमित लिखें.
अहसासों को बहुत खूब उकेरा है।
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