Thursday, November 26, 2009

फ़र्ज़

हर एक खुशी फ़र्ज़ निभा कर चली गई
मेरा पता गमो को बता कर चली गयी !

यूँ तो हर एक मौसम बिजली गिरा गया
बरसात आके घर को जला कर चली गयी
मेरा पता ग़मों को बता कर चली गयी !

क्या खूब जानती थी फिजा घर के रास्ते
फासले बहार आंख चुरा कर चली गयी
मेरा पता ग़मों को बता कर चली गयी !

मेरे नसीब में थे कहां महकते चमन
फूलो की सूरत भी कांटे चुभन कर चली गयी
मेरा पता गमो को बता कर चली गयी !

दिखा कर खुशी को रास्ते मेरे घर के
रास्तो में गहरा अँधियारा फेला कर चली गयी
मेरा पता गमो को बता कर चली गयी !

यूँ तो हमने भी देखी थी चमक सितारों की
बनके चमक भी अंगारे बरसा के चली गयी
मेरा पता गमो को बता कर चली गयी !

दिखा हर एक सूरत में प्यार छलकता जहां
बनके मेहमां घर को बसा कर चली गयी
मेरे पता गमो को बता कर चली गयी !

1 comment:

kishore ghildiyal said...

waah janaab dil ko chhu liya aapne