तेरे कदमो की आहेट सुन के हम जाग जाते थे
उस सुनेहेरे उजाले मे हम अपने को भी भूल जाते थे
कल रात हम फिर से करते रहे तेरा इंतजार
ना तू आया ना तेरी वो सुनेहरी चांदनी आई
बस करवते ही बदलते रहे हम पुरी रात भर
ना तू आया ना वो तेरी मनचली याद आई
सोचा की जाकर खोज लायू कही से तुम्हे
ओर रख लु सिऱ्हाने पर कही छुपा कर
मिल जाये वो सुकून मुझे जो तुम आ जायो
यही सोच कर बस युह्नी करवते बदलती रही
रात भर युंही उसकी याद मे जगती रही
तुम सोते रहे ओर में यादे सजोती रही
1 comment:
"अच्छा लिखा है आपने.."
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