कैसी हो.... कहाँ हो.. ? बहुत याद आती हो तुम !!!!!!!
जब से गई हो तुम मुझसे दूर, जीवन में मेरे तन्हियो का डेरा हो गया है
रह गयी है बस चंद यादे तेरी, मेरी रातो में तेरी यादो का बसेरा हो गया है
सोचती हूँ मैं जब भी अकेले में की , ऐसी क्या खता हो गयी है मुझसे
इतनी दूर जाने के बाद हमसे , अकेले में ही सिमट गयी हो तुम सबसे
आज भी याद आता है मुझे वो, मेरे रूठने पर तेरा प्यार से मना ना
और साथ में बैठ कर मुझे चिढाना, अपनी यादो में चुप से तेरा खो जाना
बहुत याद आती हो जब भी तुम, आंसुओ के साथ ठहर जाती है मेरी सांसे
तेरी हर एक शिकायत को माना है , हर पल दिल में बसा कर रखा है मैंने
जो भी तेरी जबां पर आया, उसी को आईने में सजाया है मैंने
दर्द बन गयी है अब तो ये जुदाई, नही सही जाती मुझसे तेरी ये बेरुखी
आकर देख तो तू! मेरी दुनिया, गमो ने छोड़ी है अपनी परछाई
दर्द भरा आइना दिखाया नही जाता, अपना बुलाकर यूँ पराया बनाया नही जाता
जीवन की बिच राह में छोडकर, अपनों से किनारा बनाया नही जाता
जहाँ कही भी रहो तुम, हमेशा दिल में महक बनकर बसी रहोगी मेरे !!!!!!
Wednesday, February 17, 2010
बहुत याद आती हो तुम !!!!!!
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

1 comment:
मनोभावों को कविता के माध्यम से चित्रित करने का सार्थक प्रयास - शुभकामनाएं
Post a Comment