Wednesday, February 10, 2010

वो ना जाने क्यों राहे बनाते गये ...?

देख कर मेरे घर की रौनक
वहां भी तूफान आ गया
करते रहे वो हम से मीठी बाते
फिर क्यों दिलो में जहर घोल गये !!

दुआ करते रहे घर को जलाने की
क्यों वो खुद को ही जलाते गये
करते रहे वो हम से मीठी बाते
फिर क्यों दिलो में जहर घोल गये !!

नही की थी हमने चाहत उनकी
वो ना जाने क्यों राहे बनाते गये
करते रहे वो हम से मीठी बाते
फिर क्यों दिलो में जहर घोल गये !!

जब भी देखी हमने सूरत उनकी
वफा के नाम पर वो नकाब दे गये
करते रहे वो हम से मीठी बाते
फिर क्यों दिलो में जहर घोल गये !!

लगता था उसको सबकुछ अपना
पराया बनके अंजाम दिखा गये
करते रहे वो हम से मीठी बाते
फिर क्यों दिलो में जहर घोल गये !!

2 comments:

Anonymous said...

"दुआ करते रहे घर को जलाने की
क्यों वो खुद को ही जलाते गये"
ऐसे लोग बिरले हैं पर आज भी हैं - सुंदर रचना - हार्दिक शुभकामनायें

M VERMA said...

एहसास की सुन्दर रचना